
द्विवेदी ने पीठ से कहा कि वह निर्देश मांगेंगे और इस मुद्दे पर अदालत को सूचित करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग केवल मतदाता के रूप में पंजीकरण की सीमा तक नागरिकता निर्धारित कर सकता है और किसी को निर्वासित नहीं कर सकता या यह तय नहीं कर सकता कि किसी व्यक्ति के पास भारत में रहने के लिए वीजा है या नहीं।
याचिकाकर्ता एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हालांकि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि मतदान के लिए नागरिकता एक शर्त है, लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या चुनाव पैनल के पास नागरिकता निर्धारित करने का अधिकार है।