मुकुल चौधरी की अनकही कहानी: जेल, कर्ज़ और बलिदान – एक पिता ने अपने बेटे के लिए 3.5 करोड़ का जुआ खेला | क्रिकेट समाचार
नई दिल्ली: “मिला नहीं कुछ भी पल भर में, एक दौर इसी में बीता है, बादल बहुत साथ हैं हमने, तब दरिया बनना सीखा है ((एक पल में कुछ नहीं मिलता, जिंदगी का एक पूरा दौर इसी संघर्ष में गुजर गया।) हमने अनगिनत बादल इकट्ठे किए हैं और तभी सीखा है कि नदी कैसे बनें)।”…